Loading home…

पियानो... ये वो साज़ है जिसने हमारी फ़िल्मी गानों को कुछ ऐसे छुआ, जैसे शबनम छू जाती है फूलों को...पियानो की वजह से न सिर्फ गाने और सुन्दर और सुरीले हुए पर हर एक जज़्बात जब पियानो के साथ पेश हुआ तो वो अपना नया ही रंग लेके आया... चाहे मोहोब्बत हो या जुदाई, इज़हार हो या तन्हाई..पियानो ने हर गाने को नई पोशाक पहनाई... और इससे कोई भी अछूता नहीं रहा...नौशाद अली से लेकर शांतनु मोइत्रा तक सब ने उसे अपने गानों में जगह दी...और दिलीप, राज, देव, अमिताभ सब ने पियानो के साथ गाने गाये... ये कुछ ऐसे गाने है जो मुझे याद आये..ऐसे और भी बहुत से हैं जो मुझे याद नहीं आये हैं या जिन्हें मैं नहीं जानता हूँ.. पर हाँ फिलहाल तो येही है...